- Visit Daily BLOGS For MORE POSTINGSमदन गोपाल गर्ग ,एल एम्, वी जे एम्परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
- प्रेम और परमात्मा पर्यायवाची शब्ध हैं !प्रेम शब्ध का प्रयोग सिवाय परमात्मा और गुरुजनों के कहीं करना नहीं चाहिये , बाकी सब प्रेम नहीं आसक्ति है !
मदन गोपाल गर्ग ,एल एम्, वी जे एम्
मदन गोपाल गर्ग ,एल एम्, वी जे एम्
मदन गोपाल गर्ग ,एल एम्, वी जे एम्
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संत कबीर दोहे
सब धरती कागद करूं, लखनी सब बनराय।
सात समुँदर की मसि करूं, गुरू गुन लिखा न जाय।!
कबीर ते नर अंध है, गुरू को कहते और।
हरी रूठे गुरू ठौर है, गुरू रूठे नहीं ठौर।।
गुरू बडे गोविन्द ते, मन में देखू विचारी।
हरी सुमिरे सो बार, गुरू सुमिरे सो पार।।
मदन गोपाल गर्ग ,एल एम्, वी जे एम्
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"महानता जब आपके अन्दर जागती है तो आप नीचा कुछ भी कार्य नहीं करेगें। ऐसा कुछ भी नहीं करेंगें जिससे आपको खुद भी निराशा हो।
इसलिए ध्यान रखें जैसे जैसे हम प्रभु के निकट होते जाते है हमारे अन्दर एक पूर्णता आती है , हमारा अधूरापन दूर होता है,
हमारी सम्पूर्णता जाग्रत होने लग जाती है।"
मदन गोपाल गर्ग ,एल एम्, वी जे एम्
जीवन का अर्थ है जागृति। जिनकी आँखों में नया सवेरा हो, उमंग, उत्साह, उल्लास और खुशियों से जिसने स्वयं को सजाया हो, वही भगवन का लाडला है। इसके विपरीत जो व्यक्ति उबासा होकर जागे और सारा दिन आलस्य में ही व्यतीत करे, उसका जीवन, जीवन नहीं है। जो भाग्यहीनता का रोना रोये, निरासा की अँधेरी गलियों में दुखी रह कर दूसरों का भी चैन छीन ले, ऐसा व्यक्ति उजाले की तलास नहीं किया करते हैं। हर दिन में एक जिंदगी समायी होती है। जैसे सूर्य की हर किरण में पूरा सूर्य होता है, ऐसे ही हर दिन में एक पूरा जीवन होता है। उसे जीना सीखो उसका आनंद लो। मायूसियों से मंजिलें मिला नहीं करती।
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"जीवन की सम्पूर्णता है आनन्द और आनन्द परमात्मा का ही एक रूप या एक नाम है, जिसे सच्चिदानन्द कहा जाता है। हमारा जन्म परमात्मा से मिलने के लिए ही हुआ है और इसी उद्देश्य को लेकर हम दुनिया में आए है। वस्तुतः जीवन एक अवसर है परमात्मा से मिलने के लिए।"
मदन गोपाल गर्ग ,एल एम्, वी जे एम्
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"अगर थोड़ा-सा भी कोई आपका भला करे तो आप कितना कितना धन्यवाद करते हें ।लेकिन वह जो रात-दिन आपका भला कर रहा है, आप पर कृपा कर रहा है, क्या हम इतना-सा भी नहीं कर सकते कि सुबह शाम बैठकर हाथ जोड़कर उस दाता से कहें कि प्रभु तेरा लाख-लाख शुक्र हें । तूने हम पर बड़ी कृपा की । इतनी सभ्यता का परिचय तो कम-से-कम हमें देना चाहिए ।"
मदन गोपाल गर्ग ,एल एम्, वी जे एम्
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"यदि हम आध्यात्मिक नगरी में प्रवेश करना चाहते है तो सबसे पहले वैर को छोड़ना सीखें । अभी से नियम बनाइये कि मुझे किसी से वैर नहीं रखना। वैर नहीं तो प्रतिशोध नहीं , बदला भी नहीं । अपने को बदलने में विश्वास रखिये, दूसरों से बदला लेने की इच्छा नहीं करें ।"
मदन गोपाल गर्ग ,एल एम्, वी जे एम्
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परमात्मा का नूर चारों ओर बरस रहा है, फूलों में , नदियों में , तितलियों के रंगबिरंगे पंखों में । समस्त सृष्टि उसकी सुन्दर रचना है।
इसे पर्यटक बन कर भोगो।"
परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज